ईसाले सवाब की फज़िलत
🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴
*🥀 ईसाले सवाब की फज़िलत 🥀*
✏️ प्यारे इस्लामी भाईयों और इस्लामी बहनों,
अपने मर्हूमीन को ईसाले सवाब करना उनके लिए एक बेहतरीन तोह़फ़ा हैं, जब मुसलमान दुनिया से रुख़्सत हो जाता हैं तो क़ब्र में वो कैसे आ़माल साथ ले जाता हैं ये कोई भी नही जानता, नेक आ़माल हो तो ख़ैर लेकिन अगर कोई बुरे आ़माल के साथ क़ब्र में जाता हैं तो वो अ़ज़ाब में मुब्तला हो जाता हैं तो ईसाले सवाब के ज़रीए़ उसे क़ब्र में आराम पहुंचता हैं, उसके अ़ज़ाब में कमी होती हैं, उसके गुनाह मिटाए जाते हैं, नेकों के दरज़ात बुलन्द किए जाते हैं और उसे आ़लमे बरज़ख़ में सुकून मिल जाता हैं!
➡मेरे अ़ज़ीज़ों, मरना एक न एक दिन सबको हैं इसलिए अपने मुर्दों (मर्हूमीन) को ईसाले सवाब के ज़रीए़ आराम पहुंचाओ और मरहूमीन के ह़क़ में दुआ़एं करो, जिस त़रह़ अपने करीबी लोगों से दुनिया में मौह़ब्बत करते हो उसी त़रह़ उनके विसाल के बाद ईसाले सवाब करके अपनी मौह़ब्बत का सुबूत पेश करते रहो, और ईसाले सवाब को कभी भी तर्क़ मत करो!
रोज़ाना कम अज़ कम एक मर्तबा अपने मर्हूमीन को ईसाले सवाब ज़रूर करो और अपने घर वालों को भी ईसाले सवाब के फ़ाएदे बताओ,
क्यूंकि एक न एक दिन हमें भी मौत आनी हैं!
*ईसाले सवाब का फ़ाएदा*
➡ह़ज़रते मुह़य्युद्दीन इ़ब्ने अ़रबी رَحٔمَةُاللّٰهِ تَعَالٰى عَلَئهِ एक दावत में तशरीफ़ ले गए, वहां एक नौजवान भी मौजूद था जो कि कश्फ़ के मुआ़मले में मारूफ़ था, आपने देखा कि खाना खाते हुए वो दफ़्अ़तन (यानी अचानक) रोने लगा, वजह मालूम करने पर उसने बताया कि:
"ब ज़रीए़ कश्फ़ मुझे मालूम हुआ हैं कि अल्लाह عَزَّ وَجَلَّ के हुक्म से फ़िरिश्तें मेरी मां को जहन्नम में ले जा रहे हैं"!
आप फ़रमाते हैं कि: "मेरे पास 70000 मर्तबा कलिमा तय्यबा पढ़ा हुई मह़फ़ूज़ था, मैने दिल ही दिल में उसकी मां को ईसाले सवाब कर दिया"!
वो लड़का फ़ौरन हंस पड़ा, मैने सबब पूछा तो कहने लगा कि: "मैने अभी देखा हैं कि फ़िरिश्तें (अल्लाह عَزَّ وَجَلَّ के हुक्म से) मेरी मां को जन्नत की त़रफ़ ले जा रहे हैं!
*📚 (मल्फ़ूज़ाते आला ह़ज़रत, ह़िस्सा-1, सफ़ह़ा-104)*
*रोज़ाना एक कुरआन*
➡एक बुज़ूर्ग इर्शाद फ़रमाते हैं कि किसी शख़्स ने ख़्वाब में देखा कि क़ब्रिस्तान के तमाम मुर्दे अपनी क़ब्रों से बाहर निकल कर जल्दी जल्दी ज़मीन पर से कोई चीज़ समेट रहे हैं, लेकिन मुर्दों में से एक शख़्स फ़ारिग़ बैठा हुआ हैं, वो कुछ नही चुनता, उस शख़्स ने उस से जा कर पूछा कि "ये लोग क्या चुन रहे हैं"?
तो उसने जवाब दिया: "ज़िन्दा लोग जो सदक़ा या दुआ़ या तिलावते कुरआन वग़ैरा इस क़ब्रिस्तान वालों को भेजते हैं, उसकी बरकतें समेट रहे हैं"!
उसने पूछा: "तुम क्यूं नही चुनते"?
जवाब दिया: "मुझे इस वजह से फ़राग़त हैं कि मेरा एक बेटा ह़ाफ़िज़े कुरआन हैं जो फुलां बाज़ार में हल्वा बेचता हैं, वो रोज़ाना एक कुरआने पाक पढ़कर मुझे बख़्शता हैं"!
ये शख़्स सुबह़ उसी बाज़ार में गया, देखा कि एक नौजवान हल्वा बेच रहा हैं और उसके होंठ हिल रहे हैं!
उसने नौजवान से पूछा: "तुम क्या पढ़ रहे हो"?
उसने जवाब दिया: "कि मैं रोज़ाना एक कुरआने पाक पढ़कर अपने वालिदैन को बख़्शता हूं, उसी की तिलावत कर रहा हूं"!
कुछ अ़र्से बाद उसने ख़्वाब में दोबारा उसी क़ब्रिस्तान के मुर्दों को कुछ चुनते हुए देखा, इस मर्तबा वो शख़्स भी चुनने में मसरूफ़ था कि जिसका बेटा उसे कुरआने पाक पढ़कर बख़्शा करता था, इसको देखकर उसे बहुत तअ़ज्जुब हुआ, इतने में उसकी आंख खुल गई!
सुबह़ उठकर उसी बाज़ार में गया और तह़क़ीक़ की तो मालूम हुआ कि ह़ल्वा बेचने वाले नौजवान का भी इन्तिक़ाल हो चुका हैं!
*📚(रौज़ुर्रियाह़ीन, सफ़ह़ा-177)*
👑👑👑👑👑👑👑👑👑👑
*🏁 MASLAKE AALA HAZRAT 🔴*
https://chat.whatsapp.com/ERGah4bKksUIHdlxfhJuBz
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें